Subhash Ghai Indian Movies Director Life Story

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Subhash Ghai Indian Movies Director Life Story

भारतीय फिल्म डायरेक्टर सुभाष घई इनकी फिल्म बनाने का तरीका बिल्कुल ही अलग है | भारतीय फिल्म जगत में सुभाष घई का बहुत बड़ा योगदान है यह उस समय पर फिल्म  बनाना चालू किए थे जब फिल्मी दुनिया में बहुत मंदी चल रही थी हम सभी जानते हैं कहानियां हमेशा बदलती रहती हैं |

बॉलीवुड की शुरुआत से ही हमने देखा है की हर वक्त फिल्मों की कहानियां बदलती रही है कोई वक्त था डाकुओं पर फिल्म बना एक वक़्त था अंडरवर्ल्ड के ऊपर फिल्म  बना लेकिन एवरग्रीन सब्जेक्ट है Love Stories बॉलीवुड फिल्में प्रेम की कहानियां हमेशा चलती है  |

भारतीय फिल्म जगत जब से बनी है तब से प्रेत की कहानियां पर्दे पर दिखाई जा रही है | यह कभी पुराने नहीं होते और सुभाष घई ने भी प्रेम से संबंधित बहुत सारे फिल्म बनाए इंसानी संबंध के ऊपर सुभाष घई की बहुत अच्छी पकड़ है | यही वजह है कि राम लखन जैसे फिल्म जिसमें दो भाई का संबंध को बहुत ही अद्भुत तरीके से सुभाष घई ने दिखाए है |

Subhash Ghai and Career Success Story

सुभाष घई की सबसे बड़ी बात यह है कि वह मुंबई आए थे एक्टर बनने के लिए लेकिन वह बन गए डायरेक्टर सिर्फ डायरेक्टर ही नही भारत के सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर में से एक बन गये इनके पिता एक जाने-माने डॉक्टर थे और यह नागपुर में रहते थे इनका बचपन अपने नाना नानी के पास गुजरा |

अपने आगे की पढ़ाई करने के लिए यह दिल्ली पहुंच गए| सुभाष घई स्कूल के दिनों से ही नाटक में काम किया करते थे | उसके बाद हरियाणा के रोहतक शहर से उन्होंने कॉमर्स की डिग्री ली इन्हें यूनिवर्सिटी में भी एक्टिंग के दौरान गोल्ड मेडल मिली थी |

इनके पिताजी ने इनसे कहा था कि पहले पढ़ाई करो फिर उसके बाद एक्टिंग के बारे में देख लेंगे | सुभाष घई शुरुआती दिनों में रेडियो एक्टर की काम करने के लिए बहुत शौकीन थे और यह एक बार गए थे लेकिन वहां की खालीपन देखकर यह रह नहीं पाए और वापस आ गए | और रेडियो ड्रामा में टोटल तरीके से फ़ेल रहे और वापस कभी जाने के बारे में सोचा भी नहीं |

एक्टिंग स्कूल से इन्होंने प्रॉपर ट्रेनिंग ली सर्टिफिकेट हासिल भी कर लिया | शुरुआती दिनों में उन्होंने कुछ फिल्मों में भी काम की लेकिन वह फिल्में नहीं चली | कुछ फिल्मों में उन्होंने हीरो के तौर पर काम किया पर फिर भी फिल्म  नहीं चली | कुछ दिनों बाद इनकी सोंक स्क्रिप्ट राइटिंग की तरफ बढ़ने लगी और यह फिल्में लिखने लगे |

मशहूर डायरेक्टर जो उस समय के सबसे बड़ी डायरेक्टरों में से एक थे जिनका नाम था प्रकाश मेहरा उन्होंने सुभाष घई से एक फिल्म की कहानी खरीदी लेकिन सुभाष घई ने कहा था कि इस फिल्म में हीरो मैं रहूंगा लेकिन मैं इसके पैसे नहीं दूंगा | लेकिन प्रकाश मेहरा को यह बात मंजूर नहीं थी उन्होंने मुंह मांगी कीमत देकर इस फिल्म को खरीद लिया


सुभाष घई के पास एक कहानी थी और उसे उन्होंने खुद डायरेक्ट किया इस फिल्म का नाम तक कालीचरण और इस फिल्म के रिलीज के बाद सुभाष घई ने कभी मुड़कर नहीं देखा | और यह फिल्म सुपरहिट रही इस फिल्म के बाद सुभाष घई ने सुपर हिट फिल्मों की कतार लगा दी | विधाता, कालीचरण, कर्ज, हीरो, मेरी जंग, कर्मा, राम लखन, ताल

सुभाष घई ने अपने बेहतरीन फिल्मों से भारतीय फिल्म जगत में एक मिसाल बन गए आज भी लोग सुभाष घई के बारे में बात करते हैं तो कहते हैं की सफलता उनके साथ होती है जो कभी हार नहीं मानते |

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